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Nafrat Shayari in Hindi - नफरत शायरी इन हिंदी

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मिलना बिछड़ना सब किस्मत का खेल है,
कभी नफरत तो कभी दिलो का मेल है,
बिक जाता हैं हर रिश्ता दुनियां में,
सिर्फ दोस्ती का रिश्ता यहा नॉट फॉर सेल हैं।

कुछ लोग हमारी नफरत के काबिल भी ना होते,
और हम उन पर अपनी मोहब्बत जाया कर देते हैं।

हमें बरबाद करना है तो हमसे प्यार करो,
नफरत करोगे तो खुद बरबाद हो जाओगे।

ये मत कहना कि तेरी याद से रिश्ता नहीं रखा,
मैं खुद तन्हा रहा पर दिल को तन्हा नहीं रखा,
तुम्हारी चाहतों के फूल तो महफूज रखे हैं,
तुम्हारी नफरतों की पीड़ को जिंदा नहीं रखा।

तुम नफरत का धरना कयामत तक जारी रखो,
मैं प्यार का इस्तीफा जिंदगी भर नहीं दूंगा।

उसने नफ़रत से जो देखा है तो याद आया,
कितने रिश्ते उसकी ख़ातिर यूँ ही तोड़ आया हूँ,
कितने धुंधले हैं ये चेहरे जिन्हें अपनाया है,
कितनी उजली थी वो आँखें जिन्हें छोड़ आया हूँ।

कभी उसने भी हमें मोहब्बत का पैगाम लिखा था,
सब कुछ उसने अपना हमारे नाम लिखा था,
सुना है आज उनको हमारे जिक्र से भी नफ़रत है,
जिसने कभी अपने दिल पर हमारा नाम लिखा था।

चला जाऊँगा मैं धुंध के बादल की तरह,
देखते रह जाओगे मुझे पागल की तरह,
जब करते हो मुझसे इतनी नफरत तो क्यों,
सजाते हो आँखो में मुझे काजल की तरह।

लेकर के मेरा नाम मुझे कोसता तो है,
नफरत ही सही, पर वह मुझे सोचता तो है।

नफ़रत और प्यार सब मिल चुके है मुझे,
अब जिंदगी में मुकम्मल हो चुका हूं मै।

चंद लम्हों की ज़िन्दगी है,
नफरत से नहीं जिया करते,
दुश्मनों से क्या शिकायत करे,
अब तो दोस्त भी याद नहीं किया करते।

नफरत हो तो यकीन नहीं दिलाना पड़ता हैं,
मोहब्बत में ही सबूत कि जरुरत पड़ती हैं।

ज़िन्दगी से नफरत किसे होती हैं,
मरने कि चाहत किसे होती हैं,
प्यार भी एक इत्तेफाक होता हैं,
वरना आँसूओ से मोहब्बत किसे होती हैं।

नफरत मत करना हमसे, हमें बुरा लगेगा,
बस प्यार से कह देना अब तुम्हारी जरूरत नहीं है।

कोई तो वजह होगी,
बेवजह कोई नफरत नहीं करता,
हम तो उनकी दिल कि समझते हैं,
वो हमे समझने की कोशिश नहीं करता।

नहीं हो तुम हिस्सा अब मेरी हसरत के,
तुम काबिल हो तो सिर्फ नफरत के।

हो ग़र इबादत कोई तो सिर झुका लेना चाहिए,
रूठा हो कोई अपना ग़र तो मना लेना चाहिए,
नफ़रत की आंधियां चलती रहती है हर पल यहां,
रिश्तों के चिराग़ों को हवाओं से बचा लेना चाहिए।

मुझसे नफरत करनी है तो इरादे मजबूत रखना,
वरना जरा सा भी चुके तो मोहब्बत हो जाएगी।

देख के हमें वो सिर झुकाते हैं।
बुला के महफिल में नजर चुराते हैं।
नफरत हैं हमसे तो भी कोई बात नहीं।
पर गैरो से मिल के दिल क्यों जलाते हो।

थी नफरत अक्स से, वो आईना तोड़ना सिख गया,
वो अपनी गलती पर भी मुँह मोड़ना सिख गया।

प्यार में बेवफ़ाई मिले तो गम ना करना,
अपनी आँखें किसी के लिए नम न करना,
वो चाहे लाख नफरते करे तुझसे,
पर तुम अपना प्यार कभी उसके लिए कम मत करना।

मैं फना हो गया अफसोस वो बदला भी नहीं,
मेरी चाहतें से भी सच्ची रही नफरत उसकी।

खुदा सलामत रखना उन्हें,
जो हमसे नफरत करते हैं,
प्यार ना सही नफरत ही सही,
कुछ तो है जो सिर्फ हमसे करते हैं।

जिसकी अहंकार पुरखो कि कमाई पर पले हैं,
आज वो हमसे नफरत कि लड़ाई जितने चले हैं।

नफरत को मुहब्बत की आँखो में देखा,
बेरुखी को उनकी अदाओ में देखा,
आँखें नम हुए और मै रो पड़ा,
जब अपने को गैरों कि बाहो में देखा।

अब हम तो नये नफरत करने वाले तलाश करते हैं,
क्योंकि पुराने वाले तो अब हमसे मोहब्बत किया करते हैं।

फूलो के साथ काटें भी मिल जाते हैं,
खुशी के साथ गम भी मिल जाते हैं,
यह तो मजबूरी हैं हर आशिक़ कि,
वरना प्यार में नफरत कोई जान बुझ कर नहीं करता।

उसकी नफरतो को धार किसने दी,
मोहब्बत के हाथों तलवार किसने दी।

वो इंकार करते हैं इकरार के लिए,
नफरत करते हैं तो प्यारा के लिए,
उलटी चाल चलते हैं ये इश्क़ वाले,
आँखें बंद करते हैं दीदार के लिए।

मोहब्बत करो तो हद से ज्यादा,
और नफरत करो तो उससे भी ज्यादा।

नफरतें समुंदर को देख के,
सीखा है मैने प्यार करना,
जब तक मोहब्बत है खूबसूरत नजारा है,
और दिल टूटा हो तो हर तरफ तबाही है।

तेरी जुदाई में और तो कुछ ना हो सका,
बस मोहब्बत से नफरत हो गयी।

मुझे नफ़रत सी हो गयी है
अपनी जिन्दगी से,
और तू ज्यादा खुश ना हो,
क्योंकि तू ही मेरी जिन्दगी है।

मैं काबिले नफरत हूँ, तो छोड़ दे मुझको,
तू मुझसे यूँ दिखावे की मोहब्बत न किया कर।

उसने नफ़रत से जो देखा है तो याद आया,
कितने रिश्ते उसकी ख़ातिर यूँ ही तोड़ आया हूँ,
कितने धुंधले हैं ये चेहरे जिन्हें अपनाया है,
कितनी उजली थी वो आँखें जिन्हें छोड़ आया हूँ।

इस टूटे दिल में अब कभी,
कोई और नहीं होगा,
तुमसे नफ़रत के बाद अब कोई,
दिलदार नहीं होगा।

वक़्त हर दर्द और हर नफरत को ख़तम कर देता है,
मगर कुछ दर्द और नफरत कभी ख़तम नहीं होते हैं।

ऐसी मोहब्बत न करना जो सिर्फ दिल्लगी हो,
ऐसी मोहब्बत न करना की बाद में पछतावा हो जाये,
देखना ऐसी मोहब्बत न करना, कहीं नफरत न हो जाये।

मोहब्बत करने से फ़ुरसत नहीं मिली दोस्तो,
वरना हम करके बताते नफरत किसको कहते हैं।

नफरतें लाख मिलीं पर मोहब्बत न मिली,
ज़िन्दगी बीत गयी मगर राहत न मिली,
तेरी महफ़िल में हर एक को हँसता देखा,
एक मैं था जिसे हँसने की इजाजत न मिली।

देख कर उसको तेरा यूँ पलट जाना,
नफरत बता रही है तूने गज़ब की मोहब्बत थी।

छोटी सी इस कहानी को,
एक और फ़साना मिल गया,
उनको हमसे नफ़रत का,
एक और बहाना मिल गया।

चाह कर भी मुँह फेर नहीं पा रहे हो,
नफरत करते हो या इश्क निभा रहे हो।

उसे प्यार का एहसास दिलाने के लिए,
मेरा सब कुछ खो गया,
पर नफरत तो सिर्फ दिखाई थी,
न जाने ब्रेकअप कैसे हो गया।

उन्हें नफरत हुयी सारे जहाँ से,
अब नयी दुनिया लाये कहाँ से।

जब चाहा उसने अपना बनाया मुझे,
मन भरने पर उसने ठुकराया मुझे,
गुस्सा आता था सिर्फ उसके झूठे प्यार पर,
अब नफरत करना उसने सिखाया मुझे।

हमारी दुआ थी कि वो नफरत खत्म कर दे,
उनकी दुआ थी की हम ये रिश्ता ही खत्म कर दे।

वो इनकार करते हैं इक़रार के लिए,
नफऱत भी करते हैं तो प्यार करने के लिए ,
उल्टी चाल चलते हैं ये इश्क़ करने वाले,
आंखे बंद करते हैं दीदार के लिए।

मोहब्बत करने से फुरसत नहीं मिली यारो,
वरना हम करके बताते नफरत किसको कहते है।

कभी उसने भी हमें चाहत का पैगाम लिखा था,
सब कुछ उसने अपना हमारे नाम लिखा था,
सुना है आज उनको हमारे जिक्र से भी नफ़रत है,
जिसने कभी अपने दिल पर हमारा नाम लिखा था।




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